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Answered on 07 Sep Tuition

Priya Lata

MSc Mathematics with 2 year experience of home tutor.

You need to remember only upto 30 elements.
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Lesson Posted on 22 Sep Tuition

Thakur ka Kuan ( )

Rameesa B

I am a student, I am pursuing MA hindi. I can teach hindi with basic to the students. I try my level best for students.

( ) , – ... read more

 

प्रेमचंद ने इस कहानी के माध्यम से भारतीय जातिप्रथा की सबसे घृणित परंपरा अस्पृश्यता (छुआछूत) के कारण तिरस्कार, अपमान और मानवीय अधिकारों से वंचित जीवन जी रहे अछूतों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को अभिव्यक्त किया है। पानी के लिए तरसते अछुत जीवन की वास्तविकता की यह कहानी है।

 

इसे पढ़ने के बाद आप –

 

भारतीय समाज में जातिप्रथा के कारण गैर-बराबरी, अभाव, विपन्नता, तिरस्कार, उत्पीड़न को सह रहे तमाम अछूत वर्ग की त्रासदी को जान सकेंगे। उस पर गहराई से सोच सकेंगे। 

इंसान ने ही जातिगत भेदभाव के आधार पर गैरबराबरी को बढ़ावा देकर उसे स्थायी रूप देने के लिए अनेकानेक धार्मिक, पारंपारिक, सनातनी ढकोसलों का सहारा लिया और किस प्रकार करोड़ों अछुतों को इन्सान होने के दर्जे से नीचे गिराकर गुलामों का जीवन जीने पर मजबूर किया, इस वास्तविकता को आप जान सकेंगे।

अछूत गंगी को पानी के लिए जातिप्रथा और छुआछूत परंपरा की बाधाओं को पार करके, जीवन को दांव पर लगाना पड़ता है, इस सच्चाई से आप परिचित हो सकेंगे।

गंगी की अछूत बस्ति में उनका अपना कुआं न होना अछूतों की गरीबी और आर्थिक विपन्नता की स्थिति को दर्शाती है। अछूत बस्ति आर्थिक रूप से इतनी विपन्न क्यों है? के सवाल को भी समझने में यह इकाई आपकी सहायता करेगी।

अस्पृश्यता का व्यवहार करने वाले हिंदुओं से संघर्ष करने के स्थान पर गंगी का पलायन करना, समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि जातिप्रथा और अस्पृश्यता निर्मूलन के लिए गंगी द्वारा कड़ा संघर्ष करने की आवश्यकता थी। इससे आप सहमत हो सकेंगे।

प्रेमचंद आधुनिक युग के पहले महत्वपूर्ण लेखक है जिन्होंने दलित समस्या पर सर्वाधिक गहराई से विचार किया है। प्रेमचंद के समकालीन अन्य रचनाकारों में राहुल सांकृत्यायन और निराला ने भी दलित जीवन की भयावह त्रासदी को वाणी दी है, लेकिन सबसे सशक्त रचनाएँ प्रेमचंद ही दे पाए हैं। उन्होंने आधुनिक भारतीय समाज में जातिव्यवस्था के कारण अछूत माने गए दलित समाज के त्रासद अनुभवों को अपने रचना कर्म का विषय बनाया है। ‘ठाकुर का कुआँ,’ ‘सद्गति .’ ‘दूध का दाम,’ । ‘कफन’ आदि कहानियाँ दलित जीवन में व्याप्त अभाव, पीड़ा, उत्पीड़न और दर्द को अभिव्यक्त करती हैं। उनकी कहानियों में छुआछूत का विरोध स्पष्टतः सामाजिक और आर्थिक संदों के रूप में किया गया है। प्रेमचंद मानव-मानव के बीच समानता का पुरस्कार करते हैं, और विशिष्ट जातियों के जन्मगत विशेषाधिकारों का विरोध करते है। मनुष्य का स्थान अच्छे गुण और कर्मों के आधार पर निश्चित होना चाहिए न की जन्म के आधार पर। लेकिन हिंदू धर्म के जिस तर्क के कारण जातियों का विभाजन, विभिन्न जातियों के बीच रोटी-बेटी के व्यवहार का निषेध किया गया, और अछूतों के मानवाधिकारों को छीनकर उनका शोषण किया उच्च कही गई जातियों को न केवल विशेषाधिकार दिए बल्कि उसकी सुरक्षा के लिए कानून बनाकर उन्हें कड़ाई से लागू किया जाता है। जातिव्यवस्था के तहत जन्मना जाति तय होने से व्यक्ति का न केवल सामाजिक दर्जा बल्कि व्यक्ति की आर्थिक स्थिति भी निश्चित हो जाती है। जाति के आधार पर पेशों का बंटवारा तथा उत्पादन के साधनों पर अधिकार या उससे वंचित किया जाना भी जातिव्यवस्था द्वारा निर्धारित होता है। इस सबके पीछे धर्म का आधार दिया गया है। ब्रह्मा के विभिन्न अंगों से जातियों की निर्मिति की मनगढंत झूठी कहानी जन्मना जाति निर्धारण के लिए उपयोग में लाई गई। अपने को श्रेष्ठ बनाएँ रखने के लिए इस झूठी कहानी को भाग्य, कर्मफल, पूनर्जन्म के झूठे तर्क का सहारा दिया गया।

 

  • अंधविश्वास और शिक्षा के अभाव में निम्न तबका इसे ही अपना प्रारब्ध समझता रहा। ज्ञान और शिक्षा के अधिकार से वंचित रखने का धर्म के ठेकेदारों का यह छल तब से लेकर आज तक सफल होता आ रहा है। इस धार्मिक छल-कपट, श्रेष्ठता के ढोंग, आर्थिक उत्पादनों पर इनके एकाधिकार और निम्न जातियों को मानवीय अधिकारों संचित किए जाने की साजिशों का पर्दाफाश प्रेमचंद ने अपनी कहानियों के माध्यम से किया है। ‘ठाकुर का कुआं’ कहानी अछूतों के मानव अधिकारों की पूर्ति बिना दयनीय स्थिति में जीने की त्रासदी को चित्रित करती है। वर्ण – जाति व्यवस्था जैसी अतीशय अमानुषिक रचना से हम सभी परिचित हैं। यह कोई अनायास नहीं है कि दलितों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली भारतीय जनसंख्या का साठ प्रतिशत हिस्सा दलित समुदाय है। वर्ण व्यवस्था ने समाज मे असमानता और श्रेणीनुमा ढांचा पैदा करके दलितों को सभी सुख सुविधाओं से वंचित रखा।कथित ऊँची जाति के कुओं से ये पानी नहीं ले सकते। इनका अपना कुआँ हो नहीं सकता कथित ऊँची जाति की दया पर निर्भर रहकर पानी के लिए तरसना ही इनके जीवन की त्रासदी है। घंटो याचना करने पर किसी सवर्ण का मन पसीजा तो दो चार बाल्टियों से मटके भर देंगे, वह भी एहसान जताते हुए और हजार गलियाँ देकर। पानी जैसी मानव जीवन की मूलभूत जरूरत, जो एक प्राकृतिक संपदा है। लेकिन सवर्णों ने सत्ता और संपत्ति के जोर पर इसे अपने वर्चस्व में कर लिया है। इस वर्चस्व का विरोध करने अथवा इस व्यवस्था को तोड़ने पर अछूतों को गाँव पंचायतों द्वारा अपमानित, उत्पीड़ित किया जाता है या इन्हें मार दिया जाता है। ‘ठाकुर का कुआँ’ दलितों की इसी गंभीर समस्या को उजागर करती है।
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Lesson Posted on 17 Sep Tuition/Dental Tuition

BDS-ORAL PATHOLOGY DEVELOPMENTAL CONDITIONS

Dr Bhargavi Dade

I am doctor by profession and a biology professor with experience in international teaching experience...

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Lesson Posted on 17 Sep Tuition/MBBS & Medical Tuition/Physiology

CENTRAL NERVOUS SYSTEM PHYSIOLOGY

Dr Bhargavi Dade

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Answered on 23 Sep Banking Exam Coaching/Bank Clerical Exam Coaching IBPS SO/IBPS SO Professional Paper/Law/Banking Regulations +1 Tuition/BBA Tuition/Banking Regulations & Operations less

Sayani Sen

Understand what u read..dnt just mug up

Greetings of the day! If you have completed your M.B.A or awaiting results, you can directly apply through the "career" section on the bank's website itself. Most of the banking jobs involve both sales and operational profiles. However, the private banks always stress meeting sales targets. If only you... read more

Greetings of the day!
If you have completed your M.B.A or awaiting results, you can directly apply through the "career" section on the bank's website itself. Most of the banking jobs involve both sales and operational profiles. However, the private banks always stress meeting sales targets. If only you have a passion for sales, you must join.
Regards and gratitude!

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Answered on 20 Aug Tuition

Abhinav Pandey

Whatsapp : 8601699996 for online classes

Yes! for sure, Hughes Electrical and Electronic Technology. (Pearson publication) Electrical Engineering (Arihant)
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Answered on 29 Jul Tuition/MBBS & Medical Tuition

Dr Rashmi Raheja

Medical Educator (MBBS, MD) with 6 yrs of teaching experience

It is just to avoid the refraction at the air-glass interface. Cedarwood oil has a similar refractive index, i.e. 1.5, as that of the glass coverslip, so there will be no refraction of rays when light passes from object to objective lens. (R.I. of glass coverslip is 1.5, R.I. of cedarwood oil is also... read more

It is just to avoid the refraction at the air-glass interface. Cedarwood oil has a similar refractive index, i.e. 1.5, as that of the glass coverslip, so there will be no refraction of rays when light passes from object to objective lens.
(R.I. of glass coverslip is 1.5,
R.I. of cedarwood oil is also 1.5
But R.l. of air is 1)

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Answered on 03/07/2020 Tuition

Neha Kumari

Yes, if the teacher can make good communication on the online platform.
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Answered on 02/03/2020 Financial Planning/Stock Market Trading Tuition/BCom Tuition/Stock and Commodity Markets

Siddharth Shetty

Full Time Trader and Stock market enthusiast

Let me clear two assumptions for you now1. All indicators either follow the price or lead-based on momentum but are dependent on the underlying stock. A stock with a clear trend and behaviour will also have signs which will give clear direction.2. Every symbol has an active working percentage which is... read more

Let me clear two assumptions for you now
1. All indicators either follow the price or lead-based on momentum but are dependent on the underlying stock. A stock with a clear trend and behaviour will also have signs which will give clear direction.
2. Every symbol has an active working percentage which is not stagnant. Like RSI can provide you 70-80% accuracy on a trending market, but if the market is sideways it's skill might go below 40%


So after you've understood the above, it's pretty simple.
For your question a) it may be because the market dynamics have changed and hence the indicator is less useful for the current scenario.
b) the index will always be based on the underlying stock, so if the stock is manipulated or has unclear/choppy trend, the indicator will also give ambiguous results.

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Answered on 05 May Tuition Fee Tuition/Class I-V Tuition/Computers

Pinki

Professional Dance Choreographer,Belly,Kathak,Salsa,Bachata,Bollywood Dance,Wedding Choreography

Rs 300/- hour
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