* संस्कृत में दश लकार होते हैं -- ( लकार से संस्कृत में काल का ज्ञान होता है) १. लट् लकार (वर्तमान काल ) २. लोट् लकार (आदेश देने अर्थ में) ३ . लड्॒ लकार ...
अधिकरण कारक अधिकरण का अर्थ – आश्रय। संज्ञा का वह रूप जिससे क्रिया के आधार का बोध हो उसे अधिकरण कारक कहते हैं। अधिकरण कारक के विभक्ति चिन्ह = में, पर अधिकरण कारक के...
दो स्वरों के मेल से होने वाले विकार (परिवर्तन) को स्वर-संधि कहते हैं। जैसे - विद्या + आलय = विद्यालय। स्वर-संधि छ: प्रकार की होती हैं - दीर्घ संधि गुण संधि वृद्धि संधि यण संधि अयादि संधि वृद्धि संधि